Tuesday, 5 June 2012

some photographs of DASM activities related at Koderma




shav-satta aur Bihar ki rakhail Prashasan

शव-सत्ता-और बिहार की रखैल प्रशासन
 बिहार में दो अलग-अलग जगह, दो अलग-अलग परिदृश्य में, दो अलग-अलग हत्या-कांड. पहला तो भोजपुर के ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्या-कांड एवं बाद में समर्थको द्वारा चाहुओर उपद्रवा की घटना में पुलिस का मूक-दर्शक होना, किसी से छुपा नही. पर दूसरी घटना मोतिहारी के मठिया हरियन छपरा गावं की है जहाँ बिरेन्द्र साह नमक १७ वर्षीय दलित युवक की हत्या सवर्णों द्वारा पीट-पीट कर, कर दी गयी. घटना से आक्रोशित भीड़ ने जब उपद्रवियों का रूप धरा तो प्रशासन को अपना कर्तव्य याद आही गया. पुलिस ने लाठी भी बर्षाएं और गोलियां भी चलायी. न तो भांड मिडिया को इसकी सुध लेने की फुर्सत रही, नाही दलितों की राजनीति का स्वान करने वाले हिजरे नेताओं को मुखियां की अन्तेष्ठी पर घरियाली आँसूं बहाने से फुर्सत है. बिहार के सुशासन के तो कहने ही क्या???
 मुझे रंज है कि, "मैंने अपना मौन क्यूँ कर तोड़ा????"
 मुझे अभी भी एक गहरी नींद सो लेनी चाहिए.....