Tuesday, 24 October 2017

हर गंदी वाली बात में औरत का होना जरूरी नहीं......

जेंडर आधारित भेदभाव व मान्यताओं पर साकारात्मक सोच पनप रही है पुरूषों में भी
-इन्द्रमणि साहू
पिछले एक-डेढ दशक से महिला आंदोलन, स्त्री विमर्श एवं स्त्री अस्मिता को लेकर चर्चा और बहस काफी तेज हैं। आंदोलनों में स्त्रियों की भूमिका को सामने लाने का खूब प्रयास किया गया। इसके कुछ अच्छे परिणाम भी आये। परंतु, हम पुरूषों की बस इतनी सी जिम्मेदारी व जवाबदेही नहीं है। बल्कि, पारम्परिक सोच जो वर्षो से अंदर समाया हुआ है। जिसके कारण औरत और मर्द के बीच आज भी सामाजिक भेदभाव है। उनकी सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक भागीदारी हम जल्दी स्वीकार नहीं कर पाते हैं को दूर करने की आवश्यकता है। पंचायतों में चुने गये महिला प्रतिनिधियों की भावनाओं व सोच पर उनके पति का कब्जा है। हर गंदी वाली बात में औरत को ही निशाना बनाते हैं। समाज की सबसे बड़ी विडंबना है कि जो पूज्यनीय है, संवेदनशील हैं, शक्तिशाली हैं उसे ही गंदा और दोषी बताते हैं। सभी की सभी गालियां महिलाओं से ही जुड़ा हुआ है। स्त्री को सिर्फ हम ‘स्त्री‘ (सेक्स) की नजरिये से ही देख पा रहे हैं। इस अजीब मानसिकता के विरूद्ध अभी भी संघर्ष, वह भी अपने आप से बाकी है। तभी महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और अस्मिता की रक्षा संभव है।
साहित्यकार आराधना मुक्ति अपनी एक कविता में लिखती हैं कि हर गंदी बातों में/औरतें जरूर होती हैं/बिना औरतों के/कोई बात गंदी नहीं हो सकती/क्योंकि समाज में फैली हर गंदगी/औरतों से जुड़ी होती है ..... आजाद औरत सबसे बड़ी गंदगी हैं/वो हंसकर बोले तो बदचलन/न बोले तो खूसट कहलाती हैं/पर वो.......सामान्य व्यक्ति कभी नहीं हो सकती है/अकेले रहने वाली हर औरत/एक गंदी औरत है/और उसके बारे में/सबसे ज्यादा गंदी बातें होती हैं..... वास्तव में इस कविता में मार्मिक कड़वी, हतप्रभ करने वाली सच्चाई ब्यां किया गया है। जो हम पुरूषों के लिए एक आइना है।

हम पुरूषों को मौजूदा हिंसा, गंदी वाली बात व अधिकार के परिपेक्ष्य को समझने एवं मूल्यों पर चर्चा, बहस, संवाद, वार्तालाप व विमर्श करने की जरूरत है। इसी जरूरत को फेम जैसे नेटवर्क एक मंच उपलब्ध करा रही है। विभिन्न राज्यों व जिलों में लिंग समानता, बाल अधिकार, पुरूषों की भागीदारी, सच्ची मर्दानगी, समता, समानता जैसे बिन्दुओं पर अभियान चलाकर संवाद व विमर्श प्रक्रियाओं को तेज किया है। पहले जहां ऐसे मसलों पर ज्यादातर नारीवादी महिलाऐं बहस करती थी। वहीं आज ज्यादातर हम पुरूष इसमें हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि, यह बहुत ही कम है। स्त्री व पुरूष के बीच जो सामाजिक भेदभाव है जो हम मर्दो (पुरूषों) ने बनाया है को समझने के लिए व्यापक अभियान चलाने एवं विमर्श की आवश्यकता है।

हालांकि, हर पुरूष हिंसक या क्रूर नहीं होते हैं। शायद यही कारण है कि हममें से कई पुरूष, पति, पिता या भाई आज उदाहरण व रॉल मॉडल बने हुए हैं। वे अपने बेटे-बेटियों में फर्क न कर एक ढंग से ही पालन-पोषण कर रहे हैं। लड़कियों को घर के अंदर का कामकाज सिर्फ न सिखाकर लड़कों की तरह उन्हें बाहर के कामों व मौजूदा अवसरों से भी वाकिफ करा रहे हैं। बेटियों को बेटों की माफिक मजबूत, ताकतवर, सख्त और होनहार समझ रहे हैं। वे सिर्फ नियंत्रक के रूप में नहीं बल्कि पत्नी, मां, बहन बेटी के साथ मिलकर न सिर्फ कामों में हाथ बंटाते हैं, भावनात्मक व बराबरी की बातें करते हैं, भावुक हैं, रोते भी है, खुलकर जेंडर आधारित भेदभाव को खुली चुनौती दे रहे हैं। हिंसा-क्रूरता जैसी व्यवहार से तौबा कर रहे हैं। ज्यादातर पुरूष अब यह समझने लगे हैं कि मौजूदा लैंगिक भेदभाव व असमानता का अधिकांश भाग प्रकृति ने नहीं बल्कि समाज ने पैदा किया है। हालांकि, अभी स्थिति में और सुधार की आवश्यकता है। पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे नैतिक मापदंड़ों, मूल्यों व अंतर्विरोधों को समझने की कोशिश जारी है। मान्यताएं टूट रही हैं, सोच बदल रही है फिलहाल, यही काफी है। 

इन्द्रमणि साहू
समर्पण
सुन्दरनगर, कोडरमा
9934148413






Thursday, 9 October 2014

आत्मपरिवर्तन से विष्वपरिवर्तन विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन

राजकीय मध्य विधालय इंदरवा (देहाती) एवं म0 वि0 सलैयडीह के किषोर-किषोरियों के बीच पुणे (महाराष्ट्र) से आये संत षिवकांत सिंह महाराज का आत्मपरिवर्तन से विष्वपरिवर्तन विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन समर्पण एवं नई आजादी अभियान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मा ही मन, बुद्धि-विवेक है। इसलिए हम सभी आत्मा हैं। मौके पर सभी बच्चों से दुहराया कि मैं आत्मा हॅू। उन्होंने कहा कि यह वाक्य यदि ह्नदय से बोला गया तो मन मे शांति एवं काम करने में रूचि पैदा होगा। उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान हास्ययोग का प्रयोग कराया गया। उन्होंने हास्ययोग के फायदों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपने स्वरूप के प्रति अज्ञानता ही हमारे बीच भ्रम, भय एवं भूत पैदा करता है और सारी समस्याओं का निदान आत्मानुसंधान ही है। उन्होंने कहा कि आत्मदर्षन ही ईष्वर का दर्षन है, आत्मभक्ति ही ईष्वर की पूर्ण भक्ति है और आत्मश्रद्धा ही निष्काम भक्ति है। उन्होंने बच्चों द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब भी दिये। 

व्याख्यानमाला में स्कूली बच्चों के अलावे संस्था सचिव इन्द्रमणि साहू, वार्ड सदस्य विजय यादव, बसंती देवी, मेरियन सोरेन, प्रधानाध्यापक सुभाषचंद्र, सलैयडीह के प्रधानाध्यापक सहदेव राम, विजय कु0 विष्वकर्मा, रीतलाल यादव, कालीचरण राम, सुरेष कुमार, वीरेन्द्र शर्मा, रेखा कुमारी, मो0 मुस्ताक, ज्योति कुमारी, नवयुवक संघ के अध्यक्ष छोटेलाल सिंह, षिक्षक विजय यादव, महेष यादव, युगल यादव, सुरेष यादव आदि शामिल हुए।


Saturday, 7 June 2014

12 सूत्री मांगों को लेकर सवेरा विकलांग विकास संघ की ओर से एकदिवसीय धरना

कोडरमाः 7 जून। अपने 12 सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को सवेरा विकलांग विकास संघ की ओर से उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया गया। धरना में जिले के सभी प्रखंड़ों के दर्जनों लोगों ने भाग लिया। संघ के लोगों ने कहा कि सरकार तथा जिला प्रषासन निःषक्तों के प्रति गंभीर नहीं है। जिस कारण निःषक्तों के बीच काफी समस्या उत्पन्न हो गयी है। 
धरना के उपरांत 12 सूत्री मांग उपायुक्त के द्वारा राज्यपाल को सौंपा गया। सौंपे गये ज्ञापंन में निःषक्तता पेंषन राषि जो पिछले 8 माह से बकाया है को निर्गत करने, जरूरतमंद निःषक्तों को आवष्यक उपकरण शीघ्र उपलब्ध कराने, जिला पुर्नवास केंद्र की स्थापना कराने, षिक्षित बेरोजगारों को विषेष प्रषिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराने, सदर अस्पताल में अवस्थित विकलांग बोर्ड का स्थान्तरण करने, सभी निःषक्तों को बीपीएल सूची में शामिल करते हुए इंदिरा आवास एवं शौचालय उपलब्ध कराने, उपायुक्त कार्यालय एवं निःषक्तों से संबंधित  कार्यालयों के सामने रैम्प बनवाने, पीडब्ल्यूडी एक्ट 1995 को धरातल पर लागू करते हुए सभी सरकारी योजनाओं में तीन प्रतिषत आरक्षण सुनिष्चित करने, उपायुक्त से निःषक्तों को मिलने के लिए प्रत्येक माह एक तिथि घोषित करने, 18 वर्ष से उपर के सभी निःषक्तों को बगैर बीपीएल के पेंषन की सुविधा देने, सभी प्रखंडों में आवासीय विधालय की स्थापना एवं 2010 में उपायुक्त कार्यालय के द्वारा निकाली गई चतुर्थवर्गीय कर्मचारी नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरा करने की मांग शामिल है। 
धरना कार्यक्रम को संघ के सचिव रमेष कुमार रजक, अध्यक्ष प्रभाकर सिंह, आषीष कुमार, महेष दास, राजकुमार, अजय कुमार यादव, अंजूमा खातुन आदि ने भी संबोधित किया। 
धरना एवं मांगों का समर्थनः संस्था समर्पण, दलित अधिकार सुरक्षा मंच एवं क्रेज कोडरमा इकाई ने सवेरा विकलांग विकास संघ की ओर से आयोजित धरना कार्यक्रम एवं संध की ओर से जारी 12 सुत्री मांगों का समर्थन किया है। मंच ने कहा कि सवेरा विकलांग विकास संघ की सभी मांगें जायज है। जिला प्रषासन को शीघ्र पहल करना चाहिए। समर्थन में दलित अधिकार सुरक्षा मंच के जिलाध्यक्ष बालेष्वर राम, अधिवक्ता षिवनंदन कुमार शर्मा, इन्द्रमणि साहू आदि उपस्थित हुए।
www.indramanijharkhand.blogspot.in

Saturday, 22 February 2014

दलित अधिकार एवं रोजगार के लिए पदयात्रा

सुरही (बेरमो) : दलित अधिकार सुरक्षा मंच नावाडीह द्वारा दलित अधिकार एवं रोजगार के लिए पदयात्रा निकाली गई। जिसका नेतृत्व मंच के जिला संयोजक चमनलाल कर रहे थे। पदयात्रा नावाडीह से गुंजरडीह, चपरी, बिरनी, परसबनी, अलारगो, नर्रा, तेलो, तरंगा, पपलो आदि होकर गुजरी। इस क्रम में जगह-जगह नुक्कड़ सभा हुई।
इस दौरान मुख्य रूप से अंबेडकर उत्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष वासुदेव तुरी सहित सुनीता देवी, सुरेश रविदास व सुरेश तुरी की उपस्थिति रही।

Monday, 3 February 2014

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति के अधिकारों को लेकर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

कोडरमाः 3 फरवरी। दलित अधिकार सुरक्षा मंच, समर्पण, वीर झारखंड विकास सेवा मंच एवं निदान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आज स्थानीय वर्णवाल सेवा सदन, कोडरमा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति के अधिकारों को लेकर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंच के प्रांतीय संयोजक बिनोद कुमार उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि सर्वहारा वर्ग का जमीन लूट लेना, उनके बहु-बेटे-बटियों को नौकर-नौकरानी बनाकर रखना, सरकारी स्कूलों में हमारे बच्चों को क्वालिटी एडुकेषन नहीं मिलना भी एट्रोसिटी एक्ट का ही हिस्सा है। जरूरत है सर्वहारा वर्ग को जगने और उनकी लड़ाई तेज करने का। उन्होंने कहा योजनाओं व नीतियों को शत-प्रतिषत ग्रासरूट में अनुपालन होने से विकास दिखने लगेगा। इसे जमीन पर उतारने के लिए सामुहिक नेतृत्व, श्रम दान, हर माह संवाद चक्र चलाना एवं जिला में लिगल एड कमिटि एवं सलाहकार कमिटी बनाकर काम करने की सलाह दी और उक्त कमिटी बना भी। जिसमें जिले के अधिवक्ताओं एवं समाज चिंतकों को शामिल किया गया। 

बसपा के जिलाध्यक्ष प्रकाष अम्बेदकर ने कहा कि सामंतवादी व्यवस्था और इससे उपजे व्यवस्थागत खामियों को उखाड़ फेकना पड़ेगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बालेष्वर राम ने संवैधानिक व सामाजिक अधिकारों को लेकर काफी चर्चा की और कहा कि मात्र षिक्षित होने से विकास संभव नहीं है बल्कि, मानसिक सोच में परिवर्तन लाना जरूरी है।
दलित चिंतक दिनेष कुमार दास ने कहा कि आज भी दलित समाज हाषिये पर है। उन्होंने कहा कि कानून का अनुपालन जिला में नहीं हो रहा है।
आर्य राज किषोर मोदी ने कहा कि हमें जाति से उपर उठकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने शराब के विरूद्ध एवं चकबंदी के लिए अभियान चलाने की बात कही।
अधिवक्ता सह जिला अभिभावक संध के जिलाध्यक्ष राज कुमार सिंह ने कहा कि आज पढे-लिखे फौज खड़ा करने की जरूरत है। उन्होंने षिक्षा अधिकार कानून को जिला में शत प्रतिषत अनुपालन कराने के लिए हर नागरिक को सामाजिक दायित्व के रूप में लेना चाहिए।
अधिवक्ता षिवनंदन शर्मा एवं भुनेष्वर राणा ने कहा कि थाना में एट्रोसिटी के मामले दर्ज तो होते हैं पर अधिकारियों पर राजनीतिक दवाब पड़ने पर उन्हें मजबूरन मामले को झूठे करार कर दिये जाते हैं।
वार्ड पार्षद अषोक कुमार यादव ने बीपीएल में भारी गड़बड़ी का मामलों को उजागर किया।
युवा राजद के प्रदेष सचिव सह अनुसूचित जाति-जनजाति निवारण समिति सदस्य अषोक कुमार दास ने कहा कि विषेष अंगीभूत योजनाओं में भारी गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि एट्रोसिटी मामले जो दर्ज हो रहे हैं उस पर उचित मुवाअजा भी नहीं मिल रहा है।
सिविल सोसाईटी के राम किषुन सुंडी ने कहा कि आज दलित समाज में अज्ञान, आषक्ति और अभाव के विरूद्ध काम करने की जरूरत है। उन्होंन गाय, माय और धरती की रक्षा करने की बात कही। 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से समर्पण के कार्यक्रम समन्वयक आषीष कुमार, नारायण शर्मा, अधिवक्ता रीना कुमारी, अजय कुमार, पवन पासवान, रेणु वर्णवाल, भोला प्रसाद यादव, सुरेन्द्र प्रसाद, रेणु पांडेय, संजय कुमार, योगेन्द्र गुप्ता, दिलीप कुमार, सत्येन्द्र प्रसाद, तुलसी कुमार साव, बसंती देवी, मीना देवी, सुनिता देवी, देवराज रविदास, नरेष कुमार मोदी, रामू वर्णवाल, मुखिया मंजू देवी, मनोज पासवान संगीता, कल्याण फाउंडेषन के मेरियन सोरेन सहित कोडरमा, चंदवारा, मरकच्चो, जयनगर एवं डोमचांच प्रखंड के 6 दर्जन लोगों ने भाग लिया।
इस संवाद चक्र की अगली बैठक चंदवारा में दिनांक 16 फरवरी एवं 28 फरवरी को मरकच्चो में करने  का निर्णय लिया।
कार्यक्रम का संचालन समर्पण के सचिव इन्द्रमणि साहू एवं धन्यवाद ज्ञांपन निदान संस्थान के सुनिल कुमार ने किया।